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पटवारियों के तबादले पर उठे सवाल, 3 साल से अधिक समय से एक ही हल्के में पदस्थ, नियमों की अनदेखी…..?

पटवारियों के तबादले पर उठे सवाल, 3 साल से अधिक समय से एक ही हल्के में पदस्थ, नियमों की अनदेखी…..?

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही से विशेष रिपोर्ट

राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए पटवारियों के कार्यकाल को लेकर राजस्व नियम और राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) में स्पष्ट प्रावधान है कि एक हल्के (पंचायत/ग्राम) में पटवारी का सामान्यतः 3 वर्षों का कार्यकाल निर्धारित है। इसके बाद अनिवार्य रूप से उसका स्थानांतरण दूसरे हल्के में किया जाना चाहिए ताकि कार्य में पारदर्शिता बनी रहे और हितों का टकराव न हो।

लेकिन जिले में क्या हो रहा है?

📌 गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के कई हल्कों में पटवारी 3 वर्ष की निर्धारित अवधि से अधिक समय से पदस्थ हैं।
📌 जनता और किसानों द्वारा लगातार शिकायतें करने के बावजूद स्थानांतरण की कार्रवाई लंबित है।
📌 कुछ हल्कों में पटवारी  अधिक समय से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं, जिससे राजस्व कार्यों में लापरवाही और पक्षपात की आशंका व्यक्त की जा रही है।

लंबे समय तक पदस्थ रहने से क्या प्रभाव पड़ा..?

🔹 भू-अधिकार, नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन जैसे कार्यों में पारदर्शिता की कमी महसूस हो रही है।
🔹 किसी विशेष व्यक्ति के कार्य शीघ्रता से हो रहे हैं, जबकि अन्य ग्रामीणों को बार-बार दफ्तर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
🔹 अवैध रजिस्ट्री और सीमांकन में लेनदेन की शिकायतें भी सामने आई हैं।
🔹 कुछ क्षेत्रों में शासकीय भूमि और काला जंगल की भूमि पर भी संदेहास्पद रजिस्ट्री कराए जाने के आरोप लगे हैं।

क्यों उठ रहे हैं सवाल…?

➡️ जिले में रोटेशन पॉलिसी लागू क्यों नहीं की जा रही है..?
➡️ लंबे समय से जमे पटवारियों का स्थानांतरण क्यों अटका हुआ है..?
➡️ एसडीएम और तहसीलदार द्वारा समय-समय पर समीक्षा क्यों नहीं की जा रही..?

जनता की मांग क्या है…?

👉 जिला प्रशासन को इस मामले में त्वरित संज्ञान लेना चाहिए।
👉 जिले में 3 वर्ष से अधिक समय से पदस्थ पटवारियों की सूची सार्वजनिक कर नियमानुसार तत्काल स्थानांतरण की कार्रवाई की जानी चाहिए।
👉 राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने के लिए राजस्व विभाग में निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

प्रशासन क्या करेगा…?

राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए यह आवश्यक हो गया है कि जिला प्रशासन तत्काल समीक्षा बैठक आयोजित कर 3 वर्ष से अधिक समय से एक ही हल्के में पदस्थ पटवारियों की सूची जारी कर नियमानुसार रोटेशन पॉलिसी लागू करे। इससे किसानों और आम जनता को पारदर्शी, समयबद्ध सेवा मिल सकेगी तथा भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर अंकुश लगेगा।

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